Sunday, November 8, 2009

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,,,कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,

चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है.

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,

चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है.

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,

जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है.

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,

बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में.

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो.

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,

संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम.

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,

Tuesday, November 3, 2009

निशब्द..


शब्द इस व्योम में..

..और शब्द में ये व्योम है,

शब्दों के पाणिग्रहण में..

..निशब्द भी स्तब्ध है !

Monday, June 1, 2009

हरे कृष्ण..

कारण कारज सब लागी
पाए न कोई ठौर..
गोविन्द भाव रमण जेहि
प्रीत न चाहे और..

Wednesday, April 1, 2009

उदघोष..

पुनः सर्व सार्थक सत्य यह ...
कर्म ही परम भव्य है ॥
उस परम ज्योत का अंश यह ...
अमित अक्षत अदम्य है ॥
मत हार हिम्मत, ऐ मानुष!
कृष्ण रूप वो तेरे भीतर ...
नित देता गीता ज्ञान तुझे...
धर्म: एव स्थाप्यते: .........सत्य: एव विजयते: .........