Wednesday, April 1, 2009

उदघोष..

पुनः सर्व सार्थक सत्य यह ...
कर्म ही परम भव्य है ॥
उस परम ज्योत का अंश यह ...
अमित अक्षत अदम्य है ॥
मत हार हिम्मत, ऐ मानुष!
कृष्ण रूप वो तेरे भीतर ...
नित देता गीता ज्ञान तुझे...
धर्म: एव स्थाप्यते: .........सत्य: एव विजयते: .........