Monday, October 11, 2010

॥ उदघोष ॥
"पुनः सर्व सार्थक सत्य यह ...कर्म ही परम भव्य है ॥ उस परम ज्योत का अंश यह ...अमित अक्षत अदम्य है ॥ मत हार हिम्मत, ऐ मानुष! कृष्ण रूप वो सबके  भीतर ...नित देता गीता ज्ञान हमें ...धर्म: एव स्थाप्यते: ...सत्य: एव विजयते: ..."

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