Monday, January 31, 2011

आस


कभी घट मलिन, कभी मत मलिन

कभी मैं मलिन, कभी तू भी मलिन।

ऊसर में इक आस, भीतर! कोई पास

ना वो तेरा मलिन, ना वो मेरा मलिन॥

2 comments:

दीप said...

बहुत सुन्दर भाव यूक्त प्रस्तुति
सुन्दर प्रस्तुति
बहुत बहुत शुभकामना

A V HANS said...

Thank you very much Dipankar Ji.